Electrochemical Series in Hindi.

विद्युत रासायनिक श्रेणी– यदि विभिन्न तत्वों को उनके मानक अपचयन विभव के बढ़ते क्रम तथा घटते काम में व्यवस्थित किया जाए तो इस प्रकार प्राप्त श्रेणी को विद्युत रासायनिक श्रेणी कहते है।

Electrochemical Series in Hindi

विद्युत रासायनिक श्रेणी की उपयोगिता-

  • विद्युत रासायनिक श्रेणी में जिस तत्व का मानक अपचयन विभव का मान अधिक होता है, उस तत्व में अपचयित होने की प्रवृत्ति अधिक होती है अर्थात् वह ऑक्सीकारक होता है।
  • विद्युत रासायनिक मे जो तत्व H से ऊपर उपस्थित हो, उनकी किया किसी अम्ल से कराने पर वे अम्ल में से H को प्रतिस्थापित कर देते है। जबकि वे तत्व जो H से नीचे उपस्थित हो, अम्ल से क्रिया नहीं करते।
  • विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ नीचे स्थित धातुएँ के विलयन में से आयनों को प्रतिस्थापित कर देती है।

 जैसे- CuSO4 के विलयन में Zn की छड़ रखने पर Zn, CuSO4 के विलयन में से Cu2+ आयनों को प्रतिस्थापित कर देता है।

मानक अपचयन विभव के आधार पर धातुएँ की सक्रियता श्रेणी-

Li

K

Ba

Ca

Na

Mg

Al                       ऋणात्मक अपचयन विभव अम्लों से H₂ प्रतिस्थापन की क्षमता                

Zn

Cr

Fe

Cd

Ni

Sn

Pb

[H2 मानक अपचयन विभव 0.0V]

Cu

I2

Hg

Ag

Br2

O2                             धनात्मक  अपचयन विभव अम्लों से H₂ नहीं दे सकते है

Cl2

Au

Mn

Pt

F2

क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम

Que. डेनियल सेल के लिए मानक सेल विभव 1.1V है। निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा का परिकलन कीजिये ?

Gibbs energy

Que. एक सेल के emf का परिकलन कीजिये? जिसमे निम्न अभिक्रिया होती है।

EMF

Therefore, the EMF of the cell = 0.9142V

Electrolytic Cell.

ऐसे सेल जो विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा परिवर्तित करते है, विद्युत अपघटनी कहलाते है।

इस प्रकार के सेल मे बाह्य स्रोत से विद्युत धारा सेल में प्रवाहित करते है। जिसके कारण अस्वतः प्रवर्तित रेडक्सि अभिक्रिया होती है।

वर्णन

Electrolytic Cell.

इस प्रकार के सेल मे विद्युत अपघट्य (NaCl) को गलित अवस्था में अथवा इसके विलयन को पात्र में लेते है तथा इस पात्र में दो इलेक्ट्रॉड लगाते है। जिस इलेक्ट्रॉड़ को बैटरी के धनात्मक सिरे से जोड़ते है, एनोड़ व जिसे बैटरी के ऋणात्मक सिरे से जोड़ा जाता है, उसे केथोड़ कहते है।

विद्युत अपघटनी सेल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर अस्वतः प्रवर्तित रेडॉक्स अभिक्रिया होती है, जिससे एनोड़ पर ऑक्सीकरण व कैथोड़ पर अपचयन होता है।

कुछ विद्युत अपघट्यों के विद्युत अपघटन से बने उत्पाद-

  • जलीय NaCl विलयन – कैथोड़ पर H₂ गैस तथा एनोड पर Cl₂ व जलीय विलयन में NaOH मिलता है।
  • गलित NaCl– कैथोड़ पर Na तथा एनोड पर Cl₂ मिलती है।
  • जलीय CuSO₄ विलयन– Pt इलेक्ट्रॉड़ लेने पर कैथोड़ पर Cu तथा ऐनोड़ पर O₂ गैस मिलती है।
  • Cu इलेक्ट्रॉड लेने पर– कैथोड पर Cu मिलता है, जबकि एनोड़ का क्षय होता रहता है।

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