History and features of C In Hindi
C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एक सिंपल-यूज़ प्रोसिजरल, मल्टी-पर्पस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जो अपने समय में प्रोग्रामिंग कोडिग स्पीड, वर्क एफिशिएंसी, मल्टी-सिस्टम डिवाइस पोर्टेबिलिटी कम्पेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और रिलायबिलिटी के लिए यूज़ की जाती है। C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को ज्यादातर मिड-लेवल लैंग्वेज के रूप में जाना जाता है. जैसाकि C प्रोग्रामिंग हाई-लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के एडवांटेज को डायरेक्ट मेमोरी मैनिपुलेशन जैसे लो-लेवल फीचर्स ऑपरेशन को इनेबल करती है।

आज के अधिकतर मॉडर्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से कम्प्लीटली इंस्पायर्ड है। जैसे, कुछ मॉडर्न अपडेटेड सी इंस्पायर्ड लैंग्वेज में C++, C#, Java, और Objective-C जैसी कई पॉपुलर लैंग्वेज के सिंटैक्स और कॉन्सेप्ट C लैंग्वेज से टोटली डेडिकेटेड या मिलते जुलते है।
History of the C Programming Language.
C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का डिज़ाइन डेवलपमेंट 1970 के पॉपुलर यूनिक्स और आज के मैक ओएस ऑपरेटिंग सिस्टम के डेवलपमेंट से कनेक्टेड था।
BCPL Programming Language – In 1967.
वर्ष 1967 में, ब्रिटिश कंप्यूटर साइंटिस्ट मार्टिन रिचर्ड्स ने BCPL (बेसिक कंबाइंड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज) नाम की एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कुछ समान्य प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर कंपाइलर कोडिंग पर्पस के लिए डेवलप की थी।
BCPL प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को स्पेशली रूप से सिस्टम सॉफ्टवेयर कोड और प्रोग्रामिंग कंपाइलर सोर्स कोड क्रिएट करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। BCPL लैंग्वेज ने सॉफ्टवेयर डेवलपर को कई ऐसे फीचर्स प्रोवाइड किए जिसने बाद में C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के डेवलपमेंट पर काफी अधिक इम्पैक्ट किया।
B Programming Language – In 1970.
वर्ष 1970 में, अमेरिका के बेल लैब्स में केन थॉम्पसन नाम के एक व्यक्ति ने B नाम की एक सिंपल बेसिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज डेवलप की थी। B लैंग्वेज बहुत हद तक BCPL प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर डिपेंडेंट थी। बेल लैब्स में केन थॉम्पसन ने यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के स्टार्टिंग वर्जन पर काम करते समय B प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को इम्प्लीमेंट किया। जैसाकि, B प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की अपनी कुछ लूप होल या डिसएडवांटेज थीं. उस समय B लैंग्वेज बेल लैब्स में यूज़ होने वाले नए कंप्यूटर सिस्टम हार्डवेयर डिवाइस को प्रॉपर आर्डर में हैंडल या मैनेज करने में हेल्पफुल थी।
Development of the C Programming Language – 1972.
वर्ष 1972 में, बेल लैब्स में डेनिस रिची नाम के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को डेवलप किया था। डेनिस रिची ने उस समय मौजूदा B प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के फंडामेंटल बेसिक कॉसेप्ट को इम्प्रूव किया और एक मोर पावरफुल और एफिशिएंट मल्टी-पर्पस लैंग्वेज डेवलप की।
C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को स्टार्ट में DEC PDP-11 कंप्यूटर पर डिज़ाइन और डेवलप किया गया था, और इसका उस समय के पॉपुलर यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के डेवलपमेंट पर अधिक योगदान था।
वर्ष 1972 के समय में यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सोर्स कोड को ज़्यादातर C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में फिर से री-क्रिएट या कोड किया गया था। C लैंग्वेज ने मौजूदा यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को पोर्टेबल बनाया था, जिससे की यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम एक कंप्यूटर से किसी दूसरे तरह के कंप्यूटर में मूव करना इजी हो गया था।
The C Programming Language Book – 1978.
वर्ष 1978 में, C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के डेवलपर डेनिस रिची और ब्रायन कर्निघन ने द C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नाम की एक डिटेल्ड C लैंग्वेज बुक पब्लिश की।
यह C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पब्लिश्ड बुक बहुत अधिक इफेक्टिव और एक्सप्लेन थी और इसने C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को एक लार्ज लेवल पर यूज़ होने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के रूप में पॉपुलर होने में काफी अधिक हेल्प की थी।
Standardization Improvements of the C Programming Language.
जैसे-जैसे C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज अधिक पॉपुलर होती गई, सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अलग-अलग इम्प्रूव वर्जन इम्प्लीमेंटेशन लांच होने लगे। इसके बाद सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को एक जैसा स्टेबल वर्जन बने रहने के लिए सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में समय के अनुसार समय समय पर स्टैंडर्डाइज़ किया गया।
- 1989 – ईयर में सबसे पहले ANSI ने फर्स्ट सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का एक बड़ा स्टैंडर्ड वर्जन पब्लिश किया था, जिसे बाद में ANSI C या C89 के रूप में जाना गया था।
- 1990 – ईयर में इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन आर्गेनाइजेशन (ISO) ने ANSI C को C90 के रूप में इसे अडॉप्ट किया था।
- 1999 – ईयर में मौजूदा C99 सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज वर्जन में कई इम्पोर्टेन्ट इम्प्रोवेंमेंट या इम्प्लीमेंटेशन किए गए।
- 2011 – ईयर में C11 में मॉडर्न सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से जुड़े कई नए प्रोग्रामिंग फ़ीचर और फंक्शन ऐड किए गए, जिसमें मौजूदा ओल्ड सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को मल्टीथ्रेडिंग के लिए एडवांस्ड प्रोग्रामिंग सपोर्ट ऐड किये गए है।
- 2018 – ईयर में C17 नए सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज वर्जन के C11 मौजूदा वर्जन में कई नए और एडवांस्ड इम्प्रोवेंमेंट इम्प्लीमेंट किए।
- 2024 – आज के समय में सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज C23 सबसे नया बड़ा ISO C स्टैंडर्ड सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज वर्जन बन गया है, जिससे मौजूदा लैंग्वेज वर्जन और इसकी लाइब्रेरी में और बहुत अधिक सुधार हुए।
Important Features of the C Programming Language
- Simple and Efficient – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एक नए यूजर प्रोग्रामर को कुछ रिजर्व्ड कीवर्ड्स फंक्शन या लाइब्रेरी कोड के साथ सीखना इजी बनाता है।
- Portable – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कम्प्लीटली एक पोर्टेबल डिज़ाइन डेवलप प्रोग्राम्स को मल्टीप्ल इंडिविजुअल सिस्टम डिवाइस हार्डवेयर प्लेटफॉर्म पर बहुत कम या बिना किसी मॉडिफिकेशन के रन, टेस्ट, या एक्सेक्यूट किया जा सकता है।
- Structured Programming – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज फंक्शन्स कांसेप्ट और मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग बिहैवियर को कम्पलीट सपोर्ट करता है।
- Fast Execution – यह C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम सोर्स कोड को एफिशिएंट मशीन कोड के रूप में फ़ास्ट एक्सेक्यूशन करता है।
- Middle-Level Language – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज अपने आप में एक हाई-लेवल और लो-लेवल दोनों प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के फीचर्स को सपोर्ट या मर्ज करता है।
- Rich Library – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इसके डेवलपर को स्टैंडर्ड लाइब्रेरीज के माध्यम से कई बिल्ट-इन फंक्शन्स प्रोवाइड करता है।
- Pointers – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज प्रोग्राम डेवलपर को डायरेक्ट मेमोरी एक्सेस और एफिशिएंट प्रोग्रामिंग फीचर्स सपोर्ट प्रोवाइड करता है।
- Dynamic Memory Allocation – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में किसी प्रोग्राम एग्जीक्यूशन प्रोसेस के दौरान मेमोरी को अलॉट और फ्री या रिलीज़ किया जा सकता है।
- Recursion – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में डिज़ाइन डेवलप फंक्शन्स आटोमेटिक अपने आप को जरूरत पड़ने पर कॉल कर सकते हैं।
- Extensible – C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रोग्रामर जरूरत पड़ने पर अपने कस्टम फंक्शन्स और लाइब्रेरीज को क्रिएट कर सकते हैं।

