Post-fertilization Structures and Events in Hindi.

Post-fertilization Structures and Events.

बीजांड के परिपक्व होकर बीज में बदलने तथा अंडाशय को फल के रूप में विकसित होने की सभी घटनाओं को निषेचन पश्च घटना कहा जाता है।

Post-fertilization in hindi

Endosperm.

भ्रूणपोष का विकास भ्रूण विकास के रूप में बढ़ता है। प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका बार-बार विभाजित होती है तथा एक त्रिगुणित भ्रूणपोष ऊत्तक की रचना करते  है। भ्रूणपोष संरक्षित खाद्य सामग्री से पूरित होती है और विकासशील भ्रूण को पोषक तत्व प्रदान करती है। प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक भ्रूणपोष विकास (उत्तरोत्तर केन्द्रकी विभाजन) कर मुक्त केंद्रकी के रूप में पैदा होता है। भ्रूणपोष के विकास की इस अवस्था को मुक्त केंद्रकी भ्रूणपोष कहते है। कोशिका भित्ति का निर्माण होता है तथा भ्रूणपोष कोशिकीय बन जाता है।

Example. कच्चे नारियल नारियल का पानी [मुक्त केंद्रकीय भ्रूणपोष] नारियल का सफ़ेद गुदा [कोशिकीय भ्रूणपोष]

  • बीज के परिपक्व होने से पहले भ्रूणपोष पूरी तरह से विकासशील भ्रूण द्वारा उपभोग कर लिया जाता है.
  • Example. मटर, मूंगफली और सेम।
  • कुछ बीज में भ्रूणपोष परिपक्व होने के बाद भी विद्यमान रहता है.
  • Example. अरंडी और नारियल।

Embryo.

द्विगुणित भ्रूण का असमान विभाजन होता है, जिससे उपर की ओर निलंबन कोशिका तथा नीचे की ओर आधारी कोशिका बनाती है। निलंबन कोशिका निभाग की तरफ तथा आधार कोशिका बीजांड द्वार की ओर बनती है। निलंबन कोशिका मे अनुदैर्ध्य विभाजन के द्वारा 6 से 10 निलंबन कोशिका बनती है। आधारी कोशिका मे अनुप्रस्थ विभाजन द्वारा अष्टक कोशिकाएँ बनती है। युग्मनज प्राप्त भ्रूण के रूप में वृद्धि करता है। इसके सापेक्ष ही गोलाकार ,ह्रदयाकर तथा परिपक्व भ्रूण में वृद्धि करता है।

बीजपत्रोपारिक – ऊपर की तरफ मुख्य अक्ष वह भाग जहा वह बीजाण्ड से जुड़ता है। प्रांकुर सिरे पर प्रायः समाप्त होता है।

बीजपत्राधार – नीचे की तरफ मुख्य अक्ष (भ्रूणीय अक्ष ) का वह भाग जहाँ वह बीजपत्र से जोड़ता है। मुलांत सिरा, मूलांकुर पर समाप्त होता है। मूलांकुर एक ढक्कन द्वारा आवृत्त होता है, जिसे मूलगोप कहते हैं।

एकबीजपत्री भ्रूण का विकास– एकबीजपत्र स्कुटेलम होता है। एक ही निलंबन कोशिका होती है। निचले सिरे पर भ्रूणीय अक्ष एक भ्रूणीय अक्ष मे मूल-आवरण द्वारा आवृत्त होता है, जिसे मूलांकुर चोल (कोलियोराइजा) पाई जाती है। एक बीजपत्रीय भ्रूण के बीच में प्रांकुर के ऊपर पाई जाने वाली एक खोखली पर्णयी संरचना को प्रांकुरचोल कहते है।

Seed.

निषेचन के पश्चात बीजांड बहुत से परिवर्तन होते है, अंततः बीज का निर्माण होता है।

गैर एल्बुमिनस – अनेक बीजो मे भ्रूणपोष का अभाव होता है, क्योंकि यह वृद्धि करते हुए भ्रूण द्वारा पूर्णतया उपयोग में ले लिया जाता है, ऐसे बीजो को गैर- एल्बुमिनम (अभ्रूणपोषी) कहलाते है।

Example. चना, मटर

एल्बुमिनस – कुछ बीजों में भ्रूणपोष बचा रहता है, इन्हे भ्रूणपोषी या एल्बुमिनस बीज कहते है।

Example. मक्का, गेहूँ, अरंडी

परिभ्रूणपोष – कुछ बीजों में बीजांडकाय शेष रहता है, अवशिष्ट रूप में बीजांडकाय की उपस्थिति को परिभ्रूणपोष कहते है।

Example.काली मिर्च , चुकंदर

प्रसुप्ति – जैसे- जैसे बीजांड से बीज बनकर परिपक्व होता है। उसमें जल की मात्रा कम हो जाती है, बीज शुष्क हो जाते है। उपापचयी उपापचयी क्रिया धीमी पड जाती है तथा निष्क्रिय दशा मे आ जाता है, इसे प्रसुप्ति कहते है। अनुकुल परिस्थिति मे बीज अंकुरित हो जाता है। 

फल – बीजांड तथा अंडाशय का परिपक्वन साथ-साथ होता है। बीजांड बीज मे तथा अंडाशय फल में रूपांतरित हो जाता है। अंडाशय की दीवार फल की दीवार के रूप में विकसित हो जाती है, जिसे फलभित्ति कहते है।

आभासी फल  –  कुछ प्रजाति में फल की रचना में अंडाशय के अलावा पुष्पासन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसे आभासी फल कहते है।

Example. सेब, स्ट्राबेरी, अखरोट ।

यथार्थ / वास्तविक फल – वे फल जितका विकास केवल अंडाशय से होता है, उसे वास्तविक फल कहते है।

Example. आम, अंगूर,नारियल ।

अनिषेक फल– ऐसे फल जो बिना निषेचन के फल के रूप मे विकसित होते है, अनिषेक- जनित फल कहलाते है।

Example. केला।

Advantages of Seeds.

  • प्रजनन प्रक्रिया जैसे परागण और निषेचन जल आदि से स्वंतंत्र है, बीज की रचना काफी निर्भरता पूर्ण है।
  • बीज नए प्रवास में प्रसारण के लिए अनुकूल रणनीति से युक्त होते है।
  • प्रजाति को दूसरे क्षेत्र में बसने में मदद करते है।
  • नवोद्भिद तब तक पोषण देते है, जब तक की वह खुद प्रकाश संश्लेषण न करने लगे।
  • युवा भ्रूण को कठोर बीज-आवरण सरंक्षण प्रदान करता है।
  • लैंगिक प्रजनन का उत्पाद होने की वजह से, ये नवीन जेनेटिक को पैदा करते है, जो विविधता का रूप लेता है। 

Seed Viability.

वह समय जब तक बीज अंकुरित हो सकता है. कुछ बीज की जीवन क्षमता कुछ महीने में ही समाप्त हो जाती है। तथा कुछ बीजो की जीवन क्षमता बहुत वर्षो तक की होती है। एक प्राचीन वीज ल्युपिनस आर्कटीकस है, जिसे आर्कटिक टुंड्रा से खनिज किया गया था जिसका अनुमानित रिकॉर्ड 10,000 वर्ष की प्रसुप्ति के बाद वह पुष्पित व अंकुरित हुआ था। हाल ही का एक रिकॉर्ड 2000 वर्ष पुराने खजूर के जीवन-क्षम बीज फोयोनिक्स डैक्टीलीफेरा है, जिसे मृत सागर के पास किंग हेराल्ड के महल की पुरातात्विक खुदाई के दौरान पाया गया।

नोट– आर्किड फल जैसे अंजीर (फाइकस) में 1000 लघु बीज होते है। कुछ परजीवी प्रजाति के फल जैसे ओरोबेंकि तथा स्ट्राइगा है। इसमें एक छोटे से बीज से कितना विशाल पादप तैयार होता है।

Apomixis and Polyembryony

असंगजनन – बीना निषेचन के भ्रूण/ बीज का निर्माण होता है, उसे असंगजनन कहते है।

Example. एस्ट्रेसिया तथा घास।

असंगजनन अलैंगिक जनन है, जो लैंगिक जनन का अनुहारक है। भ्रूणकोष की कोई भी कोशिका (अंड़ /सहायक/ प्रतिमुखी) भ्रूण में विकसित होती है। कुछ प्रजाति में द्विगुणित अंडकोशिका का निर्माण बिना अर्धसूत्री विभाजन के होता है, जो बिना निषेचन के ही भ्रूण बन जाता है।

बहुभ्रूणता – नीम्बू वंश और आम में भ्रूणकोष के आस-पास की बीजाण्ड कायिक कोशिका विभाजित होने लगती है तथा भ्रूण के रूप में विकसित होती है। एक बीज में एक से अधिक भ्रूण की उपस्थिति की बहुभ्रूणता कहते है। अनावृत बीजी पादपों मे सामान्यतः मिलती है। जिन बीजो में बहुभ्रूणता मिलती है उनमें आगे जाकर केवल एक ही भ्रूण परिपक्व हो पाता है, शेष सभी नष्ट हो जाते है।

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